साड़ी का काम ख़ूबसूरती को छुपाना नहीं बल्कि उभारना है: राज कपूर

साड़ी का काम ख़ूबसूरती को छुपाना नहीं बल्कि उभारना है: राज कपूर

यक़ीनन 70 के दशक में किसी हिंदी फ़िल्म में इस किस्म का डायलॉग अपने आप में बेहद बोल्ड ही कहा जायेगा लेकिन जब रचने वाला ही सिनेमाई इतिहास का सबसे ‘आवारा’ ‘जोकर’ हो तो क्या कीजै! Continue reading साड़ी का काम ख़ूबसूरती को छुपाना नहीं बल्कि उभारना है: राज कपूर

अविनाश दास ना होते तो ‘अनारकली ऑफ आरा’  बस आरा में ही रह जाती

अविनाश दास ना होते तो ‘अनारकली ऑफ आरा’ बस आरा में ही रह जाती

सलीम की अनारकली को शायद युवा वर्ग जान ना पाता अगर फिल्में ना बनती. साथ ही दुसरा सबसे बड़ा सच यह भी है कि अविनाश दास ना होते तो ‘अनारकली ऑफ आरा’ तो बस आरा में ही रह जाती. Continue reading अविनाश दास ना होते तो ‘अनारकली ऑफ आरा’ बस आरा में ही रह जाती

‘मदर इंडिया’ और ‘नर्गिस’ के अक्स वाली ‘एक हसीना’

‘मदर इंडिया’ और ‘नर्गिस’ के अक्स वाली ‘एक हसीना’

फिल्मी दुनिया में ‘मदर इंडिया’ और ‘नर्गिस’ की अक्स वाली एक हसीना के बारे में बता रहे हैं शब्दार्थ के लेखक विशाल शुक्ला Continue reading ‘मदर इंडिया’ और ‘नर्गिस’ के अक्स वाली ‘एक हसीना’

कहानी ये है कि हीरोइन दम तोड़ती रही,और हीरो हँसता रहा

कहानी ये है कि हीरोइन दम तोड़ती रही,और हीरो हँसता रहा

ऐसे किस्सों से फिल्मी गलियारे भरे पड़े हैं जिनसे ये साफ़ हो जाता है कि ‘करियर पर इश्क को तवज्जो देने की जुर्रत करने’ का खामियाजा हमेशा से अभिनेत्रियों ने ही भुगता है. Continue reading कहानी ये है कि हीरोइन दम तोड़ती रही,और हीरो हँसता रहा

अमेरिकन फिल्म जगत में स्टार है बिहार का ‘विवेक’

अमेरिकन फिल्म जगत में स्टार है बिहार का ‘विवेक’

प्रभाकर शरण, नाम तो सुना ही नहीं होगा क्योंकि यह नाम कोई खान और कपूर नहीं बल्कि अमेरिकन स्टार की है पर हैरान करने वाली बात यह है कि प्रभाकर बिहारवासी है. Continue reading अमेरिकन फिल्म जगत में स्टार है बिहार का ‘विवेक’