गाय के निबंध में समय के साथ सुधार की ज़रूरत   

गाय के निबंध में समय के साथ सुधार की ज़रूरत   

शायद अब भी बच्चे वही निबंध लिखते होंगे कि गाय एक पालतू पशु है. गाय के चार पैर, एक पूँछ और दो सींग होते हैं. मेरी जानकारी में अभी तक इन तथ्यों में कोई भी बदलाव नहीं आया है. Continue reading गाय के निबंध में समय के साथ सुधार की ज़रूरत   

डियर सहवाग! बाउंड्री के पार पहुंची हर गेंद छक्का नहीं होती

डियर सहवाग! बाउंड्री के पार पहुंची हर गेंद छक्का नहीं होती

सहवाग के चौकों-छक्कों की सर्जिकल स्ट्राइक कर रहे हैं नवीन नेगी Continue reading डियर सहवाग! बाउंड्री के पार पहुंची हर गेंद छक्का नहीं होती

किसी भगवान ने नहीं, बल्कि असम के इस इंसान ने बनाया है जंगल

किसी भगवान ने नहीं, बल्कि असम के इस इंसान ने बनाया है जंगल

एक अद्भुत ‘फॉरेस्ट मेन’ की असल कहानी बता रहे हैं विशाल शुक्ला Continue reading किसी भगवान ने नहीं, बल्कि असम के इस इंसान ने बनाया है जंगल

चुनाव:                                                               बहुत हुआ  ‘उत्तर प्रदेश’ चलो चलें ‘पूर्वोत्तर प्रदेश’

चुनाव: बहुत हुआ ‘उत्तर प्रदेश’ चलो चलें ‘पूर्वोत्तर प्रदेश’

टीवी हो या अखबार अभी हाल ये है कि हर तरफ राजनीति का मतलब उत्तर प्रदेश हो गया है.अरे भैया खुद को राष्ट्रीय मीडिया कहने वाले आप लोग उत्तर-उत्तर रटोगे तो पूर्वोत्तर की ख़बर कौन लेगा? खैर ये तो आपकी नियत और नीति होगी,बहरहाल शब्दार्थ के लखक Talha Mannan आपको बता रहे हैं मणीपुर चुनाव का हालचाल. Continue reading चुनाव: बहुत हुआ ‘उत्तर प्रदेश’ चलो चलें ‘पूर्वोत्तर प्रदेश’

क्यों गाँव में बसने वाले दलित को गरीबी से निकलने में  तीस साल लग जाते हैं?

क्यों गाँव में बसने वाले दलित को गरीबी से निकलने में तीस साल लग जाते हैं?

साम्राज्यवाद के विरोध से लेकर एक आधुनिक भारत के निर्माण की यात्रा में भी दलित की शिकायत पूरी तरह से दूर क्यों नही हुई और यदि एेसा हुआ भी है,तो आज भी बिहार के गाँव में बसने वाले दलित को गरीबी से निकलने में लगभग तीस वर्ष लग जाते हैं,जबकि किसी गैर दलित के लिए यह अवधि दो साल आँकी गयी है. Continue reading क्यों गाँव में बसने वाले दलित को गरीबी से निकलने में तीस साल लग जाते हैं?

भारत के राष्ट्रीय पशु के लिए क्यों ख़तरनाक है चीन?

भारत के राष्ट्रीय पशु के लिए क्यों ख़तरनाक है चीन?

कभी-कभी यह लगता है कि वह दिन दूर नहीं जब हम यह कहते हुए दिखेंगे कि ‘एक था टाइगर’ क्योंकि लाख प्रयासों के बावजूद हम बाघों के शिकार पर लगाम नहीं लगा पा रहे हैं.वहीं चीनी बाज़ार मुख्य रूप से इन बाघों की मौतों की वजह बन रहा है. Continue reading भारत के राष्ट्रीय पशु के लिए क्यों ख़तरनाक है चीन?