पाँच हज़ार से अधिक गाँवों में घुप्प अंधेरा,कब तक?

पाँच हज़ार से अधिक गाँवों में घुप्प अंधेरा,कब तक?

केन्द्र सरकार का दावा है कि मई 2017 तक हर गाँवों में बिजली की सप्लाई होगी, लेकिन डीएनए की रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि तक यह लक्ष्य हासिल कर पाना मुमकिन नहीं है क्योंकि राज्यों का रवैया इसको लेकर काफी सुस्त रहा है. Continue reading पाँच हज़ार से अधिक गाँवों में घुप्प अंधेरा,कब तक?

एक ख़त: मेरे शहर, मेरे दोस्त ‘लखीमपुर’ के नाम

एक ख़त: मेरे शहर, मेरे दोस्त ‘लखीमपुर’ के नाम

मेरे दोस्त! महीना मार्च का और दिल जून सा? कब तक तुम बेमौसम बेनूर बने रहोगे? आज तो उत्सव का दिन है. आबाद कर दो यहाँ के जवाँ दिलों को… Continue reading एक ख़त: मेरे शहर, मेरे दोस्त ‘लखीमपुर’ के नाम

किसी भगवान ने नहीं, बल्कि असम के इस इंसान ने बनाया है जंगल

किसी भगवान ने नहीं, बल्कि असम के इस इंसान ने बनाया है जंगल

एक अद्भुत ‘फॉरेस्ट मेन’ की असल कहानी बता रहे हैं विशाल शुक्ला Continue reading किसी भगवान ने नहीं, बल्कि असम के इस इंसान ने बनाया है जंगल

क्यों ‘इश्क में शहर होना’ आसान है मगर ‘इश्क में गाँव होना’ मुश्किल?

क्यों ‘इश्क में शहर होना’ आसान है मगर ‘इश्क में गाँव होना’ मुश्किल?

एक पत्रकार को दूसरा पत्रकार ऐसा पूछता ! कितना बढ़िया होता आप गाँव हो जाते. गाँव होना बुरा है क्या ?क्यों कोई इश्क में गाँव नहीं होता? क्यों कोई इश्क में घर नहीं होता… बता रहे हैं रजनीश वत्स Continue reading क्यों ‘इश्क में शहर होना’ आसान है मगर ‘इश्क में गाँव होना’ मुश्किल?

गाँव की हवा ने बुलाया, बंदा यूएस छोड़ ओड़िशा आया

गाँव की हवा ने बुलाया, बंदा यूएस छोड़ ओड़िशा आया

आठ साल लगातार अलग-अलग देशों में मल्टीनेशनल कंपनियों के साथ काम करने के बाद वे लौट आए थे, लेकिन फिर दो साल के लिए चले गए. इसके बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह गांव की सेवा के लिए समर्पित कर दिया. अब वे गांव के लोगों के लिए नई मिसाल बनकर उभरे हैं. Continue reading गाँव की हवा ने बुलाया, बंदा यूएस छोड़ ओड़िशा आया

फसल बीमा से आखिर क्यों चौपट हो रही हैं फसलें?

फसल बीमा से आखिर क्यों चौपट हो रही हैं फसलें?

छत्तीसगढ़ के तिल्दा के निकट सासाहोली गाँव में एक किसान हरिराम यदु के द्वारा दो एकड़ में लगाया गया धान खराब हो गया था जिसकी क्षतिपूर्ति के तौर पर बीमा कंपनी द्वारा सिर्फ 7 रूपए 38 पैसा दिया गया। जबकि हरिराम यदु को उम्मीद थी कि धान लगाने का पैसा तो कम से कम मिल जाएगा। Continue reading फसल बीमा से आखिर क्यों चौपट हो रही हैं फसलें?