1 रूपए 18 पैसे में कुपोषण दूर करना चाहती है छत्तीसगढ़ सरकार

BY- AKSHAY DUBEY ‘SAATHI’

एक तरफ जहाँ कुपोषण से आर-पार की लड़ाई की बात चल रही है वहीं छत्तीसगढ़ में ‘नवाजतन योजना’ के तहत कुपोषण से निबटने के लिए राज्य सरकार ने हास्यास्पद रकम आबंटित किए हैं.रकम इतनी मामूली है कि एक  टॉफी भी इससे नहीं खरीदी जा सकती ऐसे में कुपोषण दूर करने के दावे खोखले लग रहे हैं.  सीजीख़बर ने अपने विश्लेषण में पाया है कि कुपोषण से लड़ने बच्चों को आहार के लिए प्रति बच्चे 1रूपए 18 पैसे दिए गए हैं.  

साल 2015-16 में 9889 कुपोषित बच्चों को कुपोषण से बाहर लाने के लिये नवाजतन योजना के तहत बिलासपुर जिले को 42,77,996 रुपये दिये गए.

जिसका अर्थ होता है कि प्रत्येक लक्षित बच्चे के लिये एक साल में 432.60 रुपये का आवंटन किया गया. अर्थात् प्रति बच्चे को प्रतिदिन कुपोषण से बाहर लाने के लिये 1 रुपये 18 पैसे खर्च किए गए हैं.

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वहीं राज्य योजना आयोग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित एक दिवसीय ‘पोषण संगोष्ठी’ में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा था कि ‘’प्रदेश के बच्चों को कुपोषण से मुक्त करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है. छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद से भी बड़ी समस्या बच्चों में व्याप्त कुपोषण है. इस गंभीर समस्या को दूर करने के लिए सबसे पहले ग्रामीण अंचल खासकर वहां की माताओं-बहनों को इस बारे में जागरूक करना जरूरी है.’’

मुख्यमंत्री के इस उद्बोधन से इस मसले पर उनकी गंभीरता समझी जा सकती है. लेकिन यह गंभीरता नीतियों में लागू होती नहीं दिख रही है.

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छत्तीसगढ़ में अब भी करीब 15 फीसदी बच्चे इस कुपोषण के इस जंग में झुलस रहे हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक  छत्तीसगढ़ के 27 जिलों में कुल 4 लाख 48 हजार 8 सौ 38 बच्चे कुपोषित तथा 86 हजार 5 सौ 19 बच्चे अति कुपोषित हैं. इस प्रकार छत्तीसगढ़ में कुल 5 लाख 35 हजार 3 सौ 57 बच्चे कुपोषित हैं.

जनगणना 2011 के आंकड़ों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में 6 साल तक के 36 लाख 61 हजार 6 सौ 89 बच्चे थे. इस आधार पर छत्तीसगढ़ के करीब 15 फीसदी बच्चे कुपोषण का शिकार हैं.

 हालांकि महिला और बाल विकास मंत्री रमशीला साहू का कहना है कि ‘’राज्य सरकार के प्रयासों से छत्तीसगढ़ में बच्चों में कुपोषण की दर को कम करने में लगातार सफलता मिल रही है. कुपोषण की दर हमारे यहां 32 प्रतिशत से घटकर लगभग 29.8 प्रतिशत रह गई है. निकट भविष्य में यह और भी कम होगी.’’

लेकिन हालिया हुए इस वाकये ने कुपोषण के खिलाफ जंग की गंभीरता को कम कर दिया है. हालांकि ऐसा हाल सिर्फ छत्तीसगढ़ का ही नहीं बल्कि पूरे भारत की है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के सैंटर फार पब्लिक पॉलिसी (सी.पी.पी.) ने एक रिपोर्ट में कहा है कि अन्य देशों के बच्चों की तुलना में भारतीय बच्चे 20 गुणा अधिक कुपोषण के शिकार हैं. बावजूद सरकार व्यापक कदम उठाने से बच रही है.

 

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