अगर दुनिया बचानी है तो स्टीफन हॉकिंग की बातों को गंभीरता से लीजिए

BY- TALHA MANNAN

ब्रिटिश भौतिक शास्त्री एवं महान वैज्ञानिक ‘स्टीफन हॉकिंग’.जिन्होंने मानवता के प्रति एक बार फिर अपनी चिंता व्यक्त की है.

आज आधुनिकीकरण के इस युग में जब सम्पूर्ण मानव समाज तकनीकी विकास की ओर दिनों दिन बढ़ता जा रहा है, परमाणु संयंत्रों की संख्या में वृद्धि होती जा रही है, देश एक-दूसरे को नीचा और कम विकसित दिखाने के लिए खुद को आधुनिक तकनीकी से लैस करते जा रहे हैं, न ही हथियारों की आपूर्ति में कमी नहीं आने दे रहे हैं और न ही शत्रुता के भाव में आकर परमाणु हमलों की धमकियाँ देने से गुरेज़ कर रहे हैं, ऐसे समय में एक बूढ़ा जिसे अपने आने वाले क्षण की भी ख़बर नहीं है कि वह जीवित होगा या नहीं, मानव जाति के प्रति सोचता है, चिंता व्यक्त करता है और ख़तरों से सचेत भी करता है. और वह है ब्रिटिश भौतिक शास्त्री एवं महान वैज्ञानिक ‘स्टीफन हॉकिंग’. जिन्होंने मानवता के प्रति एक बार फिर अपनी चिंता व्यक्त की है.

Stephen Hawking

उन्होंने आगाह किया है कि मानवों की आक्रामक प्रवृत्ति और प्रौद्योगिकी का तीव्र गति से विकास, परमाणु या जैविक जंग से धरती को तबाह कर सकता है और अब मात्र कोई ‘विश्व सरकार’ ही मानव जाति को इस ख़तरे से बचा सकती है. परन्तु, प्रजातियों के तेज़ी से विलुप्त होने, वैश्विक तापमान में दिन ब दिन होते इज़ाफे और कृत्रिम बुद्धि से ख़तरे के बावजूद हॉकिंग भविष्य को लेकर आशावादी हैं. वर्तमान विश्व के सर्वाधिक बुद्धिमान वैज्ञानिक के रूप में विख्यात हॉकिंग कहते हैं कि वे मुड़कर अपनी ज़िंदगी को देखते हैं और शुक्रगुज़ार होते हैं भविष्य में उम्मीद के आइने से झाँकते हैं. लेकिन साथ ही साथ उन्हें मानव के भविष्य पर संदेह है और यह चिन्ता भी है कि मानव प्रजाति के पास एक प्रजाति के रूप में ज़िन्दा बने रहने का गुण एवं कौशल नहीं है.

वे कहते हैं कि अगर मानवता को एवं आने वाली नस्लों को भविष्य देखने के लिए ज़िन्दा रहना है तो एक ‘विश्व सरकार’ का गठन इस समय की सबसे बड़ी माँग है. क्योंकि सिर्फ विश्व सरकार ही मानवता को इन ख़तरों से बचा सकती है. वे यह भी कहते हैं कि इन ख़तरों की पहचान करने और इनके बेकाबू होने से पहले कोई सख़्त क़दम उठाये जाने की ज़रूरत है. जो एक विश्व सरकार ही कर सकती है परन्तु उन्हें इस बात से इंकार नहीं है कि वह भी निरंकुश बन सकती है. लेकिन स्टीफन हॉकिंग ने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा है. वे कहते हैं कि यह सब किसी प्रलय जैसा लग सकता है लेकिन मैं आशावादी हूँ और मुझे लगता है कि मानव जाति के प्रति चिंतित लोग इस ख़तरे से निपटने के लिए सामने आएँगे.

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