इल्ज़ाम…इल्ज़ाम…इल्ज़ाम…

इल्ज़ाम आज की तारीख में उतना ही सत्य हो गया जितना सत्य मृत्यु है…बता रहे हैं रजनीश वत्स

इल्ज़ाम शब्द बड़ा छोटा सा है पर किसी की जिंदगी में आंधी,तूफान यहाँ तक की सुनामी तक ला सकता है. इल्जाम लगाने वाले के लिये बड़ी आसानी होती है, ऊँगली उठाया, इशारा कर दिया कि फलाना चोर हैं या फिर फलाने ने इतना घपला किया, फलाना उस लड़की को छेड़ रहा था, या फिर अमूक बाबू ने सब्जी वाले का 2 टमाटर चुरा लिया. इल्जाम किसी भी तरह का हो सकता है, इसकी कोई सीमा नहीं , किसी के घर ताकने झाँकने से लेकर किसी का मानसिक उत्पीड़न तक का इल्जाम होता है. आप सोच रहे हैं आज मैं इल्जाम को लिए क्यों बैठा हूँ , अरे भाई, आज इल्जाम के बदौलत ही दुनिया चल रही है, आप किसी ऐसे दिन की कल्पना भी नहीं कर सकते जिस दिन किसी पर इल्जाम नहीं लगा हो. इल्जाम आज की तारीख में उतना ही सत्य हो गया जितना सत्य मृत्यु है.

यदि आप पर कभी इल्जाम नहीं लगा हो तो सोचिये. आपकी जिंदगी ही जहन्नुम है. पत्नियां लेट आने पर इल्जाम लगाती है, माँ बाप पत्नीव्रता होने का इल्जाम लगाते हैं यहाँ तक कि बाल बच्चे एकतरफा होने तक का इल्जाम लगाते हैं. यहाँ हर व्यक्ति इल्जाम से जूझ रहा है.

आप पूर्व प्रधानमंत्री हैं तो आप पर घोटाले का इल्जाम है यदि आप वर्तमान हैं तो विदेश यात्रा का इल्जाम है. यदि आप कुछ नहीं हैं तो बेरोजगार होने का इल्जाम भी हमारे पास पड़ा है.

अब आप बताइए आपको कैसा इल्जाम चाहिय. भाई मेरे यहाँ तो इल्जाम आपके नाम से भी ज्यादा मात्रा में उपलब्ध है, एक बच्चा पैदा हुआ , उसके नाम सोचने में महीनों गुजर जाते हैं परंतु उस पर काला-गोरा, चपटी नाक , भैंगा इत्यादि-इत्यादि होने का इल्जाम अगले 5 मिनट में लग जाता है.

एक बच्चे ने इल्जाम लगाया कि मास्टर साहब क्लास में सोते हैं , अब ये भी कोई इल्जाम हुआ , मास्टर साहब को रात में नींद नहीं आती होगी , हो सकता है मास्टर साहब कि धर्मपत्नी खर्राटे लेती होंगी , हो सकता है मास्टर साहब के बच्चे शोर गुल करते होंगे, कुछ भी हो सकता है, अब बेचारे मास्टर साहब की इसमें क्या गलती ? हम इस इल्जाम की कड़ी निंदा करते हैं.

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कड़ी निंदा से याद आया कि इल्जाम और कड़ी निंदा में रोटी-बेटी का सम्बन्ध है, कहीं कोई इल्जाम लगा नहीं कि उसकी कड़ी निंदा होने लगती है. अब किसी ने मुझ पर फेसबुकिया होने का इल्जाम लगा दिया, भाई! इतना बड़ा इल्जाम मत लगाओ, इसके सामने सम्मान भी तुच्छ जान पड़ता है, फिर भी चूँकि ये इल्जाम है तो मैं इसकी कड़ी निंदा तो करूँगा ही, ये मेरा अधिकार है और अधिकारों को मैं कर्तव्य से ज्यादा महत्त्व देता हूँ.

एक नेता जी हैं, ताजा तरीन, शो रूम से निकले नेता हैं, अभी उनका पहला सर्विसिंग भी नहीं हुआ है, आजकल इल्जाम की पूरी दूकान लेकर घूमते हैं, या कहिये कि नेता बाद में बने इल्जाम की दूकान पहले खोली है उन्होंने. किसी ने कुछ बोला नहीं, कुछ किया नहीं कि इल्जाम प्रस्तुत. मने इतना तेज तो कम्प्यूटर काम नहीं करता जितना तेज वो इल्जाम निकाल कर रख देते हैं. पर अफ़सोस ! उन पर भी किसी ने इल्जाम की पुड़िया होने का इल्जाम लगा दिया है. अब बेचारे इल्जाम से निकलने को कोई और इल्जाम ढूंढ रहे हैं.

 

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