क्या राहुल गांधी ‘बीजेपी एजेंट’ हैं ?

BY- रजनीश वत्स

कल एक भाजपा सॉरी… मोदी कार्यकर्ता से मिला. मेरे कान को अपने होंठों के नजदीक ले जाकर फुसफुसाया , कहा कि आपको पता है – मैंने कहा क्या .. बोला – राहुल गांधी बीजेपी एजेंट हैं!!

मैं तो घबरा गया, इतनी बड़ी खबर और किसी को पता तक नहीं. अयं.. ऐसा कैसे हो सकता है. मैं थोड़ा चिंतातुर हो गया. भला सोनिया गांधी को तो पता होना चाहिए. कोई सीआईए एजेंट हो सकता है, रॉ का एजेंट हो सकता है, आईएसआई का एजेंट हो सकता है परंतु भाजपा का एजेंट ?? नहीं -नहीं..

 

rahul gandhi

स्वर्गीय इंदिरा गांधी के सपनों को राहुल कैसे चकनाचूर कर सकते हैं, सोनिया जी के इरादों में करुआ तेल राहुल कैसे लगा सकते हैं. एक बार मैं मान सकता हूँ कि राहुल एलआईसी एजेंट हैं परंतु राहुल भाजपा एजेंट हैं. ये भला मैं कैसे मान सकता हूँ ? वैसे भी राहुल में कुछ बनने की काबिलियत कहाँ है ? अगर कुछ बन सकते थे तो 48 साल की उम्र में वे सबसे पहले बाप बनते. वो भी नहीं बन पाए अभी तक फिर किसी का एजेंट कैसे बन सकते हैं, हाँ..राहुल कांग्रेस का अध्यक्ष कभी भी बन सकते हैं परंतु किसी का एजेंट नहीं.

खैर ! मैंने उसके कथन का ओपीडी किया. ओपीडी का सार इस तरह है…

किसी के एजेंट होने का क्या पैमाना हो सकता है. बहुत सारे पैमाने हो सकते हैं परंतु राहुल गांधी बीजेपी के एजेंट हैं इसका भी तो कोई पैमाना होना चाइये. चाइये की नहीं चाइये !! कोई भी एजेंट अपना एक प्रोडक्ट बेचता है, उस प्रोडक्ट के लिये तमाम हथकंडे अपनाता है, राहुल गांधी जब से राजनीति में खुले तौर पर आये हैं कांग्रेस बेच रहे हैं. कांग्रेस बिक रही है, भाजपा खरीद रही है, जब कांग्रेस पूरी तरह से बिक जायेगी तो देश में भाजपा बचेगी और राहुल बचेंगे , इस तरह से राहुल भाजपा के एजेंट हो सकते हैं.
दूसरा पहलू ये है कि राहुल को कुछ बेचना ही नहीं आता. उन्होंने कांग्रेस नाम का प्रोडक्ट तो उठा लिया है पर बेच नहीं पा रहे वहीं दूसरी ओर प्रतिस्पर्धी कम्पनी अपना सारा माल मज़े में खपा रही है ऐसे में उनका प्रोडक्ट वैल्युलेस व बेकार हो गया है और इस चक्कर में भाजपा की डिमांड और सप्लाई बढ़ गई है और वे बिना अपॉइंटमेंट के भाजपा एजेंट बन गए हैं.

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तीसरा पहलू यह है कि कुछ पुराने कांग्रेसी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स राहुल गांधी के साथ डोल पत्ता खेल रहे हैं परिणामस्वरूप राहुल कभी फुनगी पर तो कभी जमीन पर लहुलोट होते रहते हैं और फायदा भाजपा को मिल जाता है.
चौथा और अंतिम बात ये मन में आई कि राहुल को कोई बढ़िया साथी मिल नहीं पा रहा है, चाहे जीवन साथी की बात हो या राजनैतिक साथी की ,अब चल अकेला -चल अकेला – चल अकेला – तेरा मेला पीछे छूटा राही चल अकेला की तर्ज पर राहुल भाजपा कार्यालय चले गये होंगे.
गलती उनकी थी नहीं पर भाजपाइयों ने होली का रंग लगा कर उन्हें एजेंट घोषित कर दिया होगा तो क्या किया जा सकता है.
खैर जो भी हो. अब यूपी के रिजल्ट के बाद , उस मोदी भक्त की बातों में शराबी की सच्चाई नजर आने लगी है.
सो राहुल गांधी भाजपा एजेंट हो सकते हैं. कौनौ बड़ी बात नहीं है.

 

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