होली है! जो बात बुरी लगे,उस पर बुरा मान जाओ

BY- Naveen Negi

हर तरफ रंग है, गुलाल है, जोश है, उल्लास है, साथ है नशा गिलासों में और आंखों में भी. लेकिन सब कुछ माफ है,क्योंकि होली है.

यह लाइसेंस है मोहल्ले में नई आयी भाभी को छेड़ने का, जवान होती बच्चियों को दबोचने का, साल भर से दबी पड़ी अपनी कुंठाओं को रंगीन पर्दों के पीछे बेपर्दा करने का. भांग जुबान पर चढ़ी हो या न हो लेकिन उसका सरूर सिर पर जरूर चढ़ा होता है. होली के हुड़दंग में लड़कियों के दुपट्टों से लेकर अधेड़ महिलाओं के पल्लुओं तक को खींचना माफ है.

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‘अंग से अंग लगाना’ से चल कर हम ‘Do me a favor let’s play Holi’ तक आ चुके हैं. फिल्मी गानों पर तेज बजता डीजे हमारे दिमाग की नसों में घुसने लगता है और उसे जाम करने लगता है. लड़की का भीगा बदन ना जाने कौन सा सुख देता है. अगर कोई लड़की इन हरकतों से इंकार करती है तो ‘बुरा न मानो होली है’ का नारा तो है ही उसके इंकार को अपनी गर्जना में दबाने के लिए.

 

बहुत सी लड़कियां इसी वजह से होली के दिन रंग से चिड़न, सिर में दर्द और होली के त्यौहार से नफरत की बाते करनी लगती हैं. कितनी ही लड़कियां इस वजह से कमरों में खुद को बंद कर लेती हैं कि मोहल्ले के कोई अंकल आकर जबरदस्ती उसे छूने लगते हैं. अफसोस तो यह कि यह सब घरवालों के सामने हो रहा होता है लेकिन होली की मस्ती में सब जायज मान लिया जाता है.

तो लड़कियों होली के दिन खुद को कमरे में बंद मत करो. जिस बात से बुरा लगे उसे सामने बोल दो. अगर कोई होली की मस्ती की आढ़ में गलत हरकत कर रहा है तो उसे झिड़क दो.

जो बात बुरी लगे, उस पर बुरा मान जाओ.

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