‘बजरंगी भाईजान’ को ताली ‘गुरमेहर’ को थप्पड़

कैसे एक ही किस्म के प्रयासों के लिए अलग-अलग मापदण्ड स्थापित करने की कवायद चल रही है,बता रहे हैं सौरभ वर्मा

gurmehar-kaur-facebook-ram-subramanian-2

पैदल और साइकिल सवार के बीच हुई टक्कर में जिस तरह साइकिल सवार का पीटा जाना तय होता है, इसी तरह मोटरसाइकिल सवार और कार में टक्कर होने पर कार चालक का पीटा जाना निश्चित होता है. सभी लोग जाति, धर्म, भाषा और संप्रदाय से ऊपर उठकर चालक को दो-दो हाथ रसीद कर देश निर्माण में अपनी जिम्मेदारी तय कर देते हैं. यह हमारे समाज के बनाए गये कुछ ऐसे नियम है,जिनका उल्लेख न तो हमारे शास्त्रों में मिलता है और न ही यह संविधान में लिखे गए हैं. लेकिन समाज का हर एक वर्ग बिना भेदभाव के इन्हें उपयोग में लाता है. ऐसा ही कुछ इसी इन दिनों गुरमेहर के साथ किया जा रहा है. जहां पाकिस्तान का नाम लेते ही बिना सोचे समझे उसके साथ गाली गलौज की जाती है और रेप की धमकियां मिलने लगती हैं. उसके युद्ध के समर्थन न करने को  पाकिस्तान का समर्थन मान लिया जाता है. यह वहीं लोग होते हैं, जो भीड़ में बिना चेहरा देखे हाथ छोड़ने को तैयार रहते हैं.

यही भीड़ इन दिनों गुरमेहर कौर के पीछे लग गई है. जो बिना मुद्दे को जाने देशभक्ति की चाश्नी में डूबकर दूसरे पर हमले को तैयार रहते हैं. मुरमेहर के वीडियो के एक पोस्टर ” मेरे पिता को पाकिस्तान ने नहीं बल्कि ने युद्ध ने मारा” को दिखाकर उसे पाक समर्थित सेना का अघोषित नेता बना दिया जाता है. जबकि गुरमेहर कौर के उसी वीडियों में दूसरे पोस्टरों को देखने की कोई जहमत नहीं उठायी जाती है. उसकी ओर से वीडियों में कुल तीन दर्जन से ज्यादा पोस्टर दिखाएं गए है. जिसमें जर्मनी, जापान और अमेरिका के बीच के युद्ध की जख्मों को दोस्ती में बदलते दिखाया और समझाया गया है. लेकिन हमारी समझ पाकिस्तान का नाम आने भर से तंग हो जाती है. चेहरा लाल और आंखों में अंगारे दौड़ जाते हैं. जरा भी यह समझने की कोशिश नहीं की जाती है कि आखिर वो कहना क्या चाहती है. जिस बेटी के बाप ने देश के लिए जान दी हो. उसे इतना तो हक मिले कि वो अपनी बात स्वतंत्रता से रख सके. दूसरे से भी उम्मीद की जानी चाहिए कि वो दो वक्त ठहरकर उसकी बात समझे. लेकिन नहीं, पाकिस्तान का नाम देखते ही आंखों में अंगारे जो दौड़ने लगते हैं. सोशल मीडिया पर इसे लेकर धमकी दी जाती है. लेकिन जब सेना में भर्ती की बात आती है. देशभक्ति का राग अलापने वाले ज्यादातर पढ़े-लिखे युवाओं को सेना में भर्ती के वक्त सांप सूंघ जाता है. वहीं जवान जब कोई जवान खाने को लेकर सवाल उठाता है, तो उसे उसके पुराने बर्ताव को लेकर बगावती करार दे दिया जाता है. उसे नजरबंद कर दिया जाता है. परिवार से संपर्क नहीं करने दिया जाता है. कोर्ट की दखलंदाजी से उसे पत्नी से मिलने दिया जाता है.

sena-food

हालांकि पूरे मामले में गलती गुरमेहर कौर की भी है, जिसने दो देशों के बीच की दोस्ती को दुश्मनी में बदलने का बीड़ा उठाया और खुद देशद्रोही बन बैठी. उसे समझना चाहिए था कि दो देशों के बीच दोस्ती केवल बजरंगी भाई जान जैसी फिल्मों में ही अच्छी लगती है.

bajrangi

जहां फिल्म के दौरान लोग पाकिस्तान के लोगों की ओर से बार्डर गेट तोड़ने पर झूम उठते हैं,  तालियों की गड़गड़ाट से सिनेमा हाल गूंज उठता है. मुन्नी के मामा बुलाने पर आसूं आंखों से निकलने को बेताब दिखते हैं. लेकिन गुलमेहर कौर को समझना चाहिए था कि जिन देशों का बंटवारा हिंसा के बीच हुआ हो, जहां सांप्रदायिक हिंसा को शांत कराने गये गणेश शंकर विद्यार्थी की हत्या कर दी जाती हो, जहां अहिंसा के पुजारी का अंत हिंसा से हुआ हो, ऐसे में उस उन्मादी भीड़ से शांति स्थापित करने की बात करना कहां की जायज बात है. गुरमेहर जैसे लोगों को समझना चाहिए कि जिस देश के हर चार में से तीन बच्चे डाक्टर, इंजीनियर, वकील और व्यापारी बन रहे हो, उस देश में इतिहास के पन्नों में दर्ज महात्मा गांधी, गणेश शंकर विद्यार्थी की शिक्षा कहां तक जिंदा रह सकेंगी.

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s