गज़ब का ‘आदर्श’ पेश कर रहे हैं झारखण्ड के ज़्यादातर सांसद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘सांसद आदर्श ग्राम योजना’ की हालत झारखंड में बहुत बुरी है. कुछ एक सांसदों के अलावा ज़्यादातर सांसदों का प्रदर्शन काफी खराब है.

इस योजना के तहत होना तो यह था कि लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को अपनी विकास निधि से एक-एक ग्राम पंचायत को चुन कर  उसे आदर्श बनाने की जिम्मेदारी लेनी थी मगर यहाँ के सांसदो ने यह ज़िम्मेदारी तो ली लेकिन उस पर खरा उतरने में नाकाम हुए.  उन्हें चयनित पंचायत में वहां के लोगों या ग्रामसभा की मांग पर और उनकी सहमति से विकास योजनाएं शुरू करनी थी लेकिन जनवरी महीने तक  राजद के राज्यसभा सांसद प्रेमचंद गुप्ता, भाजपा के राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी तथा गोड्डा लोकसभा सीट से भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे को छोड़ बाकी दूसरे इस काम में काफी पीछे हैं.

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डॉ प्रदीप कुमार बलमुचू और सिंहभूम लोकसभा सीट से भाजपा सांसद लक्ष्मण गिलुवा इस सूची में पिछलग्गू साबित हुए हैं. इनके द्वारा गोद लिए गए पंचायतों की अधिकतर योजनाएं 15 जनवरी 2017 तक शुरू ही नहीं हुई हैं.

aadarsh-gram

सांसदों के इस काम के आकलन का पैमाना पहले चरण के लिए चयनित पंचायतों की कुल योजनाओं को ज़मीन पर उतारने को बनाया गया है.

आजतक की एक रिपोर्ट के मुताबिक राजद सांसद प्रेमचंद गुप्ता ने कोडरमा के चोपनडीह पंचायत को चयनित किया था. यहां शुरू किये जानेवाले कुल 63 परियोजनाओं में से 29 में काम पूरा हो चूका है वहीं 27 में काम चालू है और 7 पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है. वहीं परिमल नाथवानी ने रांची के बड़ाम पंचायत को चुना. यहां चलनेवाली 62 परियोजनाओं में से 28 का काम पूरा हो चूका है, 26 पर काम जारी है और 8 परियोजनाओं पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है.

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने गोड्डा के बोहा पंचायत को आदर्श ग्राम घोषित किया है. यहाँ होनेवाले 41 परियोजनाओं में से 9 पर काम पूरा हो चूका है, 23 पर काम चल रहा है और 9 परियोजनाओं पर अभी काम शुरू ही नहीं हुआ है. वहीं केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा के जरबा पंचायत का हाल भी बुरा है. यहां होनेवाले 63 परियोजनाओं में से 16 पर काम पूरा हो चूका है. 11 पर अभी काम चल रहा है और 36 परियोजनाओं पर अभी काम शुरू ही नहीं हुआ है. राज्यसभा सांसद डॉ प्रदीप कुमार बलमुचू के आदर्श ग्राम भालकी के भीतर 104 परियोजनाओं में से सिर्फ 4 का ही काम पूरा हुआ है. 7 पर अभी काम चल रहा है. वहीं 93 परियोजनाओं पर अभी काम शुरू ही नहीं हुआ है.

एक तरफ इस योजना को लेकर देशव्यापी ढिंढोरा पीटा जा रहा है वहीं भाजपा शासित झारखण्ड की यह स्थिति इन सांसदो की उत्तरदायित्व पर सवाल खड़ी कर रही है.

 

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