नॉर्थ-ईस्ट की लड़कियां जो बनी ही छेड़ने के लिए हैं

नॉर्थ-ईस्ट की लड़कियों के लिए हमारे समाज में कैसा नज़रिया है,बता रहे हैं नवीन नेगी

यह ख़बर इतनी जरूरी भी नहीं कि आप ज्यादा गौर करें, दिल्ली में रोज होने वाली घटनाओं की तरह एक और रेप हुआ है. जैसे कि मेट्रो में रोज कुछ जेबें कटती हैं, सड़क पर कुछ लोग ट्रैफिक तोड़ते हैं, कहीं कोई इमारत ढह जाती है उसी तरह कि एक आम सी घटना घटी है. इसे और भी ज्यादा मामूली बनाती है यह बात कि यह रेप की वारदात एक नॉर्थ-ईस्ट की लड़की के साथ हुई है.

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जी हां! नॉर्थ-ईस्ट की लड़कियां जो बनी ही होती हैं शाम के वक्त छेड़ने के लिए, जो शराब पीती हैं, छोटे कपड़े पहनकर दिल्ली की तंग गलियों में घूमती हैं, आपके साथ ऑटो शेयर कर लेती हैं, यहां तक कि कभी-कभी तो रूम मेट के तौर पर भी शेयरिंग के लिए तैयार हो जाती हैं. उनकी ये जो शेयरिंग की आदत है ना, कमबख्त हमारी सोसाइटी के लिए बनी ही नहीं है. ये कमअक्ल लड़कियां इस बात को समझती ही नहीं और तैयार हो जाती हैं रात के वक्त किसी अंजान की कार में लिफ्ट के लिए.

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अपने घरों से मीलों दूर ये दिल्ली आती हैं इस सोच के साथ कि शायद बड़े शहर का दिल भी बड़ा ही होगा, लेकिन बदले में यह बड़ा शहर इन्हें देता है नस्लीय फब्तियां, अश्लील इशारे और बेशर्म निगाहें. इनकी अलग टोन में बोली जाने वाली हिंदी से लेकर इनकी आंखों के बदले स्वरूप तक को हम सहन नहीं कर पाते. आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में रहने वाली नॉर्थ ईस्ट की 81 % लड़कियों के साथ किसी न किसी प्रकार का उत्पीड़न होता है. इनमें सबसे ज्यादा 23 प्रतिशत उत्पीड़न के मामले मकान मालिक द्वारा किए जाते हैं.

इस रेप को आम बनाने वाली एक बात और है कि यह घटना घटी है हौज खास जैसे इलाके में, जो कि हाई-सोसाइटी वाला इलाका है. जहां महंगे रेस्टॉरेंट हैं-कैफे हैं-पब हैं और जब यह सब हैं तो शराब और पार्टियां तो होंगी ही. वक्त रात का है लड़की शराब पी रही है, अजनबी लोगों के साथ शराब पी रही हैं तो सेक्स तो कर ही सकती हैं. यह सब कुछ काफी है किसी को भी टेकन फॉर ग्रांटेड यानी कि आसानी से उपलब्ध समझने के लिए. और अगर वो आसानी से उपलब्ध न हो तो क्या किया जाए, उसका रेप कर दिया जाए-वही तो किया है.

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परेशान करने वाली बात यह है कि इस मामले में महिलाएं भी लड़कियों को ही दोष दे रही हैं. सबसे पहला रिएक्शन जिसने मुझे हैरान किया वह एक शादीशुदा महिला का था, उनका कहना था कि रात के 1 बजे बाहर जाने की जरूरत ही क्या थी, दूसरी महिला ने साथ में कहा कि ये मणिपुर-नगालैंड वाली लड़कियों को इन सबसे फर्क भी नहीं पड़ता. वे अपनी बिल्डिंग का किस्सा सुनाने लगी कि उनके फ्लैट के पास कुछ नॉर्थ-ईस्ट की लड़कियां रहती है जो दिन भर गाना-बजाना शोर शराबा करती हैं, छोटे कपड़े पहन कर घूमती हैं पूरी बिल्डिंग का माहौल खराब किए रहती हैं. किसी का संगीत या कपड़े पूरी बिल्डिंग का माहौल बिगाड़ देते हैं.

लेकिन अगर वह लड़की नॉर्थ-ईस्ट से न होती, उसने शराब नहीं पी होती, वह किसी अंजान से कार में लिफ्ट नहीं लेती और अकेले ही रास्ता तय करती या मान लीजिए कि ऑटो या कैब हायर कर लेती तो क्या उसके साथ यह घटना नहीं घटती. जवाब हम सभी जानते हैं.

इसीलिए तो यह घटना कोई ख़ास नहीं बेहद आम सी बात है, क्राइम रिकॉर्ड के आंकड़ों में एक नंबर और बढ़ाने वाली घटना-फेसबुक पर कुछ और स्टेटस लिखी जाने वाली घटना-चैनलों पर चलने वाली 100 ख़बरों को पूरा करने वाली एक घटना.

एक बेहद आम सी घटना…

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