अविनाश दास ना होते तो ‘अनारकली ऑफ आरा’ बस आरा में ही रह जाती

अनारकली नाम ही काफी है. वह नाम जो काफी कुछ बयां कर जाता है. ‘अनारकली डिस्को चली…’ गाना के बाद और गाना के पहले भी लोग इसके बारे में जानते थे. हां, अनारकली को फिल्मों और गानों में अलग-अलग ढंग से पेश किया गया है.सच तो यह भी हैं कि अनारकली का इतिहास भी काफी चर्चित रहा है, सलीम की अनारकली को शायद युवा वर्ग जान ना पाता अगर फिल्में ना बनती. साथ ही दुसरा सबसे बड़ा सच  यह भी है कि अविनाश दास ना होते तो ‘अनारकली ऑफ आरा’ तो बस आरा में ही रह जाती.

 

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अनारकली को भले ही हम बदनाम कर दिए पर अनारकली तो अनारकली है जो कि जवान ही नहीं बल्कि बूढ़ों के दिल पर भी राज करती है. अनारकली का नाम सुनकर ही बिना दांत वाले मुंह में भी लार भर आता है, कभी-कभी तो टपक भी जाता है.

avinash-dasअनारकली को इस बार अविनाश दास ने फिर से चर्चा में ला दिया. अविनाश दास लिखते हैं कि  ‘’सन 1953 में पहली अनारकली की कहानी कही थी नंदलाल जसवंतलाल ने. के. आसिफ़ की अनारकली तो ख़ैर कल्ट ही है. हमने भी अपनी अनारकली खोजी. मतलब कुल ये है कि सबकी अपनी अपनी अनारकली होती है.’’

पता नहीं उनको आरा की अनारकली में क्या पसंद आ गया. खैर, इसके बारे में वह खुद ही बताएंगे पर मुझे नहीं लगता कि शादीशुदा इंसान अनारकली को चाहने की बात सबके सामने कह पाएगा. उसी बूढें व्यक्ति की तरह लार को मुंह में दबाए रहेगा. पर कितनी देर तक, यह तो वक्त बताएगा.karan-johar

‘अनारकली ऑफ आरा’ का पोस्टर से परदा करण जौहर हटाए तो लगा कि अनारकली अब नाच देगी पर पोस्टर तो पोस्टर होता है भाई, सब्र रखो बहुत जल्दी ‘अनारकली ऑफ आरा’ नाचेगी, सारी दुनिया को नचाएगी. अनारकली तो अनारकली है बाकि सब फूलझड़ी हैं..

‘अनारकली ऑफ आरा’ का पोस्टर सोशल मीडिया पर होली में भऊजी का चोला बनकर छा गया है. खूब भा रहा है लोगों को, लोग फेसबुक पर वाव,लाइक,एंग्री का रिएक्शन देना भूल गए हैं, बस दिल वाला गुलाबी रिएक्शन पर झट से टिप दे रहे हैं.मुझे तो लगता है कि  का जादू चल गया है. पर इतनी जल्दी कह देना थोड़ी जल्दबाजी होगी. पर क्या करूं दिल तो ‘अनारकली ऑफ आरा’ के पोस्टर पर फिदा हो गया है. स्वरा भास्कर को पोस्टर में देखकर फिल्म देखने की आग दोगुनी हो गई है.

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एक तरफ सचमुच की स्वरा भास्कर और वो भी अनारकली के रूप में, अनारकली कहीं और की नहीं बल्कि बिहार के आरा जिला की तो फिर पोस्टर देखकर कौन नहीं जाना चाहेगा ‘अनारकली ऑफ आरा’ को देखने.अविनाश दास की पहली फिल्म है ‘अनारकली ऑफ आरा’. अगर बढिया से बदनाम ना कर पाए अनारकली को तो फिर याद रखिएगा बिहार के सलीम टाइप दर्शक आपको छोड़ेंगे नहीं, और अगर बढिया से बदनाम कर दिए तबो नहीं छोड़ेगे…

 

 

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