टाटा चाय का अलार्म हमें सचमुच नींद से जगाएगा?

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सुबह उठना-चाय पीना-तैयार होना-ऑफिस चल देना…हमारा दिन ऐसे ही शुरू हो रहा और इसी तरह रात हो जाती है, दिनभर कई घटनाएं हमारी आंखों के सामने होकर गुजरती हैं. कुछ पर हम सहम जाते है, कुछ पर गुस्सा निकालने लगते हैं और कई घटनाओं पर सिर्फ आंखों को झपकी देकर आगे बढ़ जाते हैं.

हमारी इसी झपकी को दूर करता टाटा चाय का नया एड बाज़ार में आया है. अपने जाने-पहचाने सिग्नेचर टोन ‘जागो रे’ के साथ. और यकीन मानिए इस बार यह एड सच में हमें नींद से जगाता है. हमारे भीतर का वह एक्टिविज़्म जो किसी ना किसी घटना के होने का इंतजार करता रहता है, उसी पर यह एड चोट करता है. यह हमारी मानसिकता को भी खरोचता है कि हम जागने के लिए किसी अलार्म के बजने का इंतजार क्यों करते रहते हैं. एड को स्ट्रीट प्ले की तर्ज पर तैयार किया गया है, जिसके बोल हैं…

अलार्म अभी  बजा नहीं, किसान अभी मरा नहीं

अभी यह ब्रिज गिरा नहीं, खिलाड़ी अभी हारा नहीं

और अभी यहां… रेप हुआ नहीं

ब्रिज गिरने दो, किसान को आत्म हत्या करने दो

मेडल हारने दो और रेप होने तो दो

अलार्म थोड़ा बजने तो दो…

tata-teaनए साल पर बेंगलुरू में हुई मास मॉलेस्टेशन की घटना के बाद जिस तरह का विरोध कुछ दिनों तक फेसबुक और तमाम अलग-अलग सोशल मीडिया साईट्स पर देखने को मिला उस पर भी यह एड कटाक्ष करता है. उत्तर प्रदेश-पंजाब-महाराष्ट्र के किसान आत्महत्या करते जा रहे हैं हम सिर्फ रिपोर्ट लिखकर अपने काम को पूरा समझ रहे हैं. कहीं कुछ गलत हो रहा है तो इंडिया गेट-जंतर-मंतर तक कैंडल मार्च निकाल रहे हैं. हम सब अलार्म बजने का इंतजार कर रहे हैं, कब किसी बुरी घटना का अलार्म बजेगा और कब हम दोबारा अपना-अपना एक्टिविज्म जगा पाएंगे.

 

टाटा ने सबसे पहले 2007 में ‘जागो रे’ सीरीज़ की शुरुआत की, इस एड में जब नेता वोट मांगने आते हैं तो एक युवा लड़का नेताओं से मुश्किल सवाल पूछने लगता है. इसके बाद इसी सीरीज में जनता को वोट करने के लिए प्रेरित करता हुआ एड भी बनाया गया. इसके बाद 2012 में जिस वक्त देश भर में अन्ना आंदोलन अपने चरम पर था और जनता भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतर आई थी, तब टाटा ने एंटी करप्शन कैम्पेन के तहत अपना एड बनाया जिसकी टैग लाइन थी ‘अब खिलाना बंद, पिलाना शुरू’. 2014 में लोकसभा चुनाव में मोदी लहर को सभी ने देखा, लेकिन हर बार की तरह नज़रों से ओझल रहीं देश की महिला वोटर. टाटा ने लोकसभा चुनाव के समय इस मुद्दे पर ‘काला टीका’ के साथ एड तैयार किया, जिसमें महिलाओं को बताया गया कि वे 49% वोटर की हिस्सेदारी रखती है और वे अपना वोट जरूर दें. महिला सशक्तिकरण की दिशा में  ही टाटा के एड के साथ शाहरुख खान भी जुड़े और उन्होंने अपनी फिल्मों की शुरुआत में महिला अभिनेत्री का नाम अपने नाम से पहले लगाने की बात स्वीकार की.

सोशल मूवमेंट से खुद को जोड़ने की कोशिश में टाटा के सामने अब यह चुनौती थी कि वह नया क्या लेकर आएं, चुनाव-भ्रष्टाचार-महिला सश्क्तिकरण जैसे मुद्दे वे कवर कर चुके थे, अब इन सबसे आगे बढ़कर ‘जागो रे 2.0’ तैयार किया गया है, इसमें दूसरों जगाने से पहले खुद जागने की बात की गई है…

अलार्म बजेगा, हम उठेंगे, फिर काफी काम है हमें

कैंडल मार्च यहां-हड़ताल वहां

वह्ट्स एप पर आग लगाना है, फेसबुक पर गुस्सा दिखाना है

ब्लैक फ्राइडे-हंगर स्ट्राइक

काला बैंड पहनना है, एक्टिविज्म को जगाना है

पर फिलहाल…

अलार्म बजा नहीं

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