चुनाव: बहुत हुआ ‘उत्तर प्रदेश’ चलो चलें ‘पूर्वोत्तर प्रदेश’

टीवी हो या अखबार अभी हाल ये है कि हर तरफ राजनीति का मतलब उत्तर प्रदेश  हो गया है.अरे भैया खुद को राष्ट्रीय मीडिया कहने वाले आप  लोग उत्तर-उत्तर रटोगे तो पूर्वोत्तर की ख़बर कौन लेगा? खैर ये तो आपकी नियत और नीति होगी,बहरहाल शब्दार्थ के लेखक Talha Mannan आपको बता रहे  हैं मणिपुर चुनाव का हालचाल.

irom-sharmila1सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम के खिलाफ धैर्यपूर्वक सोलह वर्षों तक भूख हड़ताल करने वालीं मणिपुर की मानवाधिकार कार्यकर्ता ‘इरोम शर्मिला’ एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इस बार वे मणिपुर से विधानसभा चुनाव लड़ रही हैं और तत्कालीन मुख्यमंत्री ‘ओकराम इबोबी सिंह’ को टक्कर भी दे रही हैं. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी काँग्रेस मुक्त प्रदेश नारे के साथ मैदान में है लेकिन दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है, वाली कहावत यहाँ पूरी तरह फेल होती नज़र आ रही है.

इरोम शर्मिला ने पहले चरण के मतदान से पहले ही मणिपुर की राजनीति में हलचल मचा दी है. उन्होंने कहा है कि ”भारतीय जनता पार्टी ने उनकी पार्टी के टिकट पर मुख्यमंत्री ओकराम के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए छत्तीस करोड़ रुपये देने की पेशकश की थी.” भाजपा ने उनके इस बयान का सिरे से खंडन कर दिया है लेकिन राज्य के वोटरों की एक बड़ी तादाद ऐसी है जो यह मानती है कि इस लौह महिला की बात में कहीं न कहीं कुछ सच्चाई तो अवश्य होगी.

इरोम ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि उनका लक्ष्य मुख्यमंत्री बनकर राज्य से उक्त अधिनियम को समाप्त करना है. इससे पहले भी इरोम के भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मिलने की खबरें भी आईं थीं. उस समय यह कहा गया था कि भाजपा पूर्वोत्तर के इस महत्वपूर्ण राज्य पर काबिज़ होने के लिए इरोम शर्मिला को अपने खेमे में लाना चाहती है. अब एक बार फिर इरोम ने छत्तीस करोड़ की बात कहकर पूर्वोत्तर की राजनीति गर्म कर दी है.

irom-sharmila-2

इस बार विधानसभा चुनाव में मणिपुर का रंग कुछ फीका नज़र आ रहा था  ऐसे में इरोम ने अपने इस खुलासे से विरोधी खेमे में खलबली मचा दी. हालांकि भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि ”छत्तीस करोड़ रुपये तो भारतीय जनता पार्टी राज्य के पूरे चुनाव अभियान में भी खर्च नहीं कर रही है. ऐसे में किसी का पार्टी पर ऐसा आरोप लगाना हास्यास्पद है”

विदित हो कि शर्मिला ने पीपुल्स रीसर्जेंस एंड जस्टिस पार्टी का गठन करके राज्य की बीस विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है लेकिन चुनाव आयोग से हरी झंडी न मिलने पर उनका दर्जा निर्दलीय का ही है.

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s