प्यार की एक चिट्ठी जिसे पढ़कर आप अपनी पुरानी यादें ताज़ा कर सकते हैं

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To,

  My Love

 

………भले ही फरवरी में प्यार-की बयार तेज चलती हो, पर ऐसा नहीं है कि मार्च,सितंबर,दिसंबर… में तुम याद नहीं आती. याद क्या करना, याद तो याद है पर तुम कोई याद नहीं हो और ना ही मेरा गुज़रा जमाना. तुम मेरी क्या हो, यह तो तुम्हे पता है ना? …फिर बताऊं किसको? जमाने को, जमाने को क्या बताना, जमाना कुछ नहीं समझेगा. जमाने को तो गुलाबों जैसी लाली और चमकते अक्षरों वाले कार्ड ही दिखते हैं.kiss_letter_

 

कितनी बार मैनें तुमको सरसों का फूल वाला गुलदस्ता दिया पर तेरी सहेलियां मजाक उड़ाती थी कि एक गुलाब नहीं खरीद सकता है तेरा प्यार, और ना जाने क्या,क्या कहती….

मुझे याद है जब मैंने तेरे प्यार में उस बन रहे पुलिया पर ‘आरएस’ लिखा था तो तेरी सहेली बोलती थी पगला है तेरा आशिक. पर क्या करूं मेरी हिम्मत नहीं होती थी कागज पर तेरे नाम को लिखने की. डर लगता था कि पता नहीं काग़ज़-कलम ठीक से चला पाऊंगा या नहीं, मेरा राइटिंग पसंद आएगी की नहीं. पर देख उस मोटे-मोटे टेढे अक्षरों ने डायरेक्ट तेरे दिल में छाप छोड़ी.

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आज वेलेंटाइन-डे है. सब एक-दुसरे को महंगा-महंगा गिफ्ट दे रहे हैं. मैनें भी तेरे पसंद के रंग की एक टी-शर्ट खरीदी है. पहनकर निकला हूं, दो-चार यार बोल रहे थे कि तोहफा मिल गया साहेब को. मैं भी मुस्कुराकर उनके शक को यकीन में बदल दिया. मुस्कुराते हुए चल रहा हूं, जैसे कि तू देख रही है मुझको. चलते-चलते उसी जगह पर आ पहुंचा हूं,जहां पर तेरे-मेरे नाम का पहला अक्षर लिखा था. अरे, आजतक वह नाम मिटा नहीं है. उसको छुआ तो थोड़ा भर-सा गया है, मेरे जख्मों की तरह. मैं वहीं पर बैठा हूं तेरे इंतजार में, लाल टी-शर्ट पहनकर. गुलाब नहीं तोड़ा मैनें क्योंकि सरसों फिर नाराज हो जाता ना. हां, अपने हाथों से लिखा कागज का टुकड़ा जरूर लाया हूं. एक शायरी लिखकर-

तेरे आने का इंतज़ार

नहीं है, नहीं है,

तेरे मुस्कुराने का इंतज़ार

नहीं है, नहीं है,

हां, है तो साथ में

सरसों का फूल

वो गांव का पुल

पर तेरे आने का इंतज़ार

नहीं है, नहीं है,

तुम हो मेरे शब्द में

अहसास बनकर,

मेरे सपनों की

आस बनकर,

बस तड़पन की आग

नहीं है, नहीं है.

 

          From

         Your Love

 

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