समय निकालकर घूम आइए ‘आदिवासी-मेला’

मेला भारतीय संस्कृति के मेलजोल का सबसे बड़ा केन्द्र रहा है.मेले में घूम-फिर लेने भर से तरह-तरह की चीज़ों और लोगों से हमारा परिचय हो जाता है.ऐसे में संस्कृति की अकूत सम्पदा लिए हुए आदिवासियों के मेले में जाने का मौका मिले तो चूकना नहीं चाहिए.अगर आपके पास समय हो तो घूम आइए ओड़िशा.

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दरअसल ओड़िशा की राजधानी भुवनेश्वर में हर साल होने वाले आदिवासी मेले का शुभारंभ हो गया है.यह मेला भुवनेश्वर के आदिवासी मैदान में हर बार  गणतंत्र दिवस के मौके पर लगता है. जिसका यहाँ के लोग साल भर इंतजार करते हैं.इस बार मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मेले का उद्घाटन किया.

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मेला को नौ जोन में बांटा गया है जिसमें आदिवासी ग्राम, आदिवासी हाट,आदिवासी हस्तशिल्प, आदिवासी खाद्य बाजार, सरकारी स्टॉल, चित्रकला मंडप, हस्तकला मंडप व आदिवासी नृत्य मंडप बनाए गए हैं. इस बार मेला परिसर में अलग-अलग जनजाति वर्ग के 24 घर बनाए गए हैं. पारंपरिक आदिवासी शैली में बने ये घर लोगों का ध्यान अपनी ओक आकर्षित कर रहा है. आदिवासी मेला में अबकी बार 30 पिंडी बनाई गई हैं जिनमें हरड़, बहेडा,आँवला, सिकाकाई, ईमली, झुणा व पालुअ वगैरह जंगली द्रव्य बेचने के लिए रखे गए हैं. इसके अलावा सरकारी विभागों के भी स्टॉल लगाए गए हैं. मेले का आयोजन ओडिशा राज्य आदिवासी विकास परिषद और जनजाति विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जाता है.

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