कहानी ये है कि हीरोइन दम तोड़ती रही,और हीरो हँसता रहा

ऐसे किस्सों से फिल्मी गलियारे भरे पड़े हैं जिनसे ये साफ़ हो जाता है कि ‘करियर पर इश्क को तवज्जो देने की जुर्रत करने’ का खामियाजा हमेशा से अभिनेत्रियों ने ही भुगता है, सिनेमा की इस हकीक़त से रूबरू करा रहे हैं  विशाल शुक्ला

देव आनंद-दिलीप कुमार से लेकर सैफ अली खान और शाहिद कपूर तक के किस्सों की लंबी फेहरिस्त है लेकिन अधिकांश ने अपने से कई साल  छोटी यहाँ तक की कई मामलों में अपनी से आधी उम्र तक की लड़कियों से शादी कर घर बसा लिया और पीछे छूट गया तो बस अभिनेत्रियों का अधर में लटका करियर और जीवन-संबंध.

यूँ तो सदा से मायानगरी को स्त्री-पुरुष संबंधों के मामलों में अपेक्षाकृत खुला ,वर्जनामुक्त और हक-हकूकवाला माना जाता रहा है. लेकिन इतिहास के आंकड़े चीख- चीख कर कहते हैं कि प्रेम-संबंधों या रोमांस के मामलों में महिलाओं ने ही मुँह की खाई है. पुरुष अंह और सामंती सोंच की आँच से सत्तर एमएम का पर्दा भी नही बच सका.

चालीस और पचास के दशक से शुरु करने पर इस फेहरिस्त में देव आनंद का नाम बरबस ही आ जाता है. उस दौर में सुरैया-देव आनंद के इश्क के चर्चे न सिर्फ फिल्मी मैगजीनों को मसाला दे रहे थे बल्कि यह राष्ट्रीय चर्चा का विषय भी बन चुका था. किस्सागोई का आलम यह था कि एक बार कुछ स्कूली छात्र तत्कालीन राष्ट्रपति श्री राजेंद्र प्रसाद से पूछ बैठे कि आखिर दोनों शादी कब करेंगे. लेकिन सुरैया से रोमांस टूटने के बाद देव आनंद ने तो एक दिन शूटिंग से भागकर कल्पना कार्तिक से शादी कर ली लेकिन सुरैया को ताउम्र अकेला रहना पडा. बात यहीं खत्म नही होती पितृसत्ता की पराकाष्ठा देखिए कि उस समय देव आनंद के साथ करीब चार-पांच फिल्मे करने वाली कल्पना हमेशा के लिए गायब हो गईं उनकी शादी तो टिकी लेकिन कल्पना नजर नही आईं, देव आनंद के देहांत पर भी नही.

उन्हीं के समकालीन दिलीप कुमार और मधुबाला का किस्सा भी कुछ अलहदा नही है, ‘अमर’ से शुरु उनका प्रेम ‘मुगल ए आजम’ के दरम्याँ परवान चढा और ऐसा चढा कि मधुबाला ने फिल्में करना कम कर दिया लेकिन कुछ ही समय में दिलीप कुमार से अलगाव के बाद दिलीप कुमार ने कुछ ही बरस के अंदर न सिर्फ खुद से बीस बरस छोटी सायरा बानों से शादी कर ली बल्कि अपने तुच्छ मर्दवादी अहं की तुष्टि के लिए मधुबाला को बीआर चोपडा की फिल्म ‘नया दौर’ से निकलवाया और एक अदालती मुकदमें में मधुबाला के खिलाफ गवाही भी दी. मधुबाला ने भी कथित सामाजिक स्वीकार्यता के लिए किशोर कुमार से ब्याह रचाया पर यह संबंध भी टिक न सका और इन संबंधों की परीणिति उनकी मौत के रुप में हुई.

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सत्तर के दशक की सर्वाधिक ग्लैमरस अभिनेत्री कही जाने वाली परवीन बाबी की निजी संबंधों में विफलता का ठीकरा अक्सर उनके महत्वाकांक्षी व्यक्तित्व पर फोड़ा जाता है लेकिन महेश भट्ट, डैनी और कबीर बेदी से संबंधो को लेकर छलावा उनसे बर्दाश्त नही हुआ और इसकी कीमत उन्होंने ‘सीजोफ्रेनिया’ जैसी बीमारी का शिकार होकर चुकाई. कहते हैं कि इस दौरान वह कबीर बेदी के साथ रिलेशनशिप में थीं पर वो भी उनका साथ उनके गाढ़े वक्त में न दे सके. आगे चलकर महेश भट्ट ने दूसरी शादी कर ली और डैनी ने खुद से लगभग आधे उम्र की गैर फिल्मी लडकी से शादी करके घर बसा लिया और परवीन बॉबी की लाश मुम्बई के एक फ्लैट में तीन दिन तक सड़ती रही.

लगभग यही फिल्मी कहानी जीनत अमान की भी लगती है. देव आनंद से संबंधों की चर्चा होने पर उसे देव आनंद का तो हीरोइज्म माना गया पर जीनत की साख पर बट्टा लग गया. आगे चलकर जब वह संजय खान के साथ गंभीर रिलेशनशिप में थी और उनकी गुपचुप शादी भी हुई पर एक किस्सागोई के अनुसार संजय खान एक फिल्मी पार्टी में उन्हें थप्पड मारकर ‘नायक’ बन गए पर जीनत का करियर और निजी जीवन दोनों खत्म हो गए. यूँ तो इस रिश्ते को संजय खान ने भी भोगा लेकिन विलेन बनी तो केवल जीनत अमान.

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यदि आधुनिक दौर की बात करें तो डान-टू की शूटिंग के दौरान जब प्रियंका और शाहरुख की नजदीकियों की बात ऊठी तो हमारी परंपरानुसार प्रियंका पर ही बसी-बसाई गृहस्थी को नुकसान पहुँचाने का आरोप मढ़ दिया गया.

एक बात और कि ऐसा नही है जो फिल्मी शादियाँ लंबे समय तक चलीं उनमें पितृसत्ता का असर नही रहा या तो अभिनेत्रियों ने फिल्मी करियर को अलविदा कह दिया या अभिनेता पतियों के दिलफेंक किस्सों को नजरंदाज करना प्रारंभ कर दिया. नरगिस ने जहाँ वहीदा रहमान-सुनील दत्त के रिश्तों को नकारा वही जेनिफर ने शशि कपूर- शबाना आजमी के प्रेम संबंधों को नजरंदाज किया यही कदम जया भादुडी ने ‘जया बच्चन’ के तमगे को बनाए रखने के लिए रेखा-अमिताभ के मामले में किया ताकि ‘अभिमान’ की कहानी कहीँ घर में न दोहराई जाए.जबकि जया उस समय स्थापित स्टार थीं और अमिताभ की पहली हिट – जंजीर बस रिलीज हुई ही थी.

कपूर खानदान में ऋषि कपूर –नीतू सिंह के रिश्तें में भी नीतू ने पारिवारिक जीवन चलाने के लिए कई सालों की शोहरत को पल भर में अलविदा कह दिया.

कहने का लब्बोलुआब यह है कि रिश्तों को चलाने के लिए अभिनेत्रियों ने या तो करियर को अलविदा कह दिया या फिर रिश्ता ही बिखर गया. ढूँढने पर भी किसी अभिनेता द्वारा घर बैठने या करियर से ब्रेक लेने का उदाहरण नही मिलेगा.

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