‘किन्नर मेघा’ की शादी इस सदी की सबसे बड़ी घटना मानी जानी चाहिए

एक ओर जहाँ लोग किन्नरों को हिकारत की निग़ाह से देखते हैं या उनके साथ दोयम दर्जे का सलूक किया जाता है ऐसे में एक ख़बर आई है जो बदलती भारतीय मानसिकता की बानगी पेश कर रही है.

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ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में एक किन्नर महिला तमाम भ्रांतियों और मिथकों को तोड़ते हुए एक पुरूष से शादी कर ली है.यह हमारे समाज के लिए काफी सुखद और बड़ी घटना के रूप में देखा जाना चाहिए. यह मिसाल कायम करने वाली ट्रांसज़ेंडर का नाम मेघा है जिन्होंने बासुदेव नाम के युवक से विवाह किया है.

मेघा ने ना केवल शादी की हैं बल्कि वे माँ भी बनना चाहती हैं.मेघा कहती हैं कि, ‘लोग सोचते हैं कि ट्रांसजेंडर शादी नहीं कर सकते, मां नहीं बन सकते हैं. मैं उन्हें गलत साबित कर रही हूं. हम भी सामान्य जिंदगी जीने की चाह रखने वाली महिलाएं हैं.’

मेघा ने बकायदा इसके लिए स्पेशल सर्जरी कराई है जिससे वह आगे चलकर मां बन सके. अब मेघा और वासुदेव आने वाली जिंदगी के लिए काफी उत्साहित है. मगर चिंतित भी है मेघा आगे कहती हैं कि ‘’अगर अधिकारों की बात करें तो ट्रांसजेंडर को शिक्षा, रोजगार और समाज के अंदर भी जिंदगी आसान नहीं है.शिक्षा के लिए पर्याप्त मौके नहीं हैं और न ही रोजगार’’ मेघा ने कहा कि ‘’ट्रांसजेंडर्स को लेकर लोगों के दिमाग में गलत धारणा बैठी हुई है उसे दूर करना बेहद जरूरी है और इसी धारणा को तोड़ने के लिए उसने यह कदम उठाया है’’

हाँलाकि भारत में परंपरागत रूप से पर किन्नरों का समाज में विशेष स्थान रहा है लेकिन 1871 में अँग्रेज़ों के द्वारा इनको  अपराधी समूह घोषित किए जाने के बाद इनकी हालत बदतर रही है .स्वतंत्रता के बाद इन्हें इससे छुटकारा मिल गई मगर इनकी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ. अब उच्चतम न्यायालय ने तीसरे लिंग का दर्जा दिया. सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि ‘’किन्नरों को सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा समुदाय मानते हुए इन्हें आरक्षण का लाभ दिया जाए.’’ लेकिन अब तक इन्हें समाज में प्रचलित छवि से मुक्ति नहीं मिल पाई है. पहली किन्नर विधायक शबनम मौसी अक्सर कहती हैं कि “हमको कोई काम पर रखता नहीं था. हमें अच्छा नहीं समझते थे, बुरा समझते थे. गंदी निगाह और तिरस्कार की नज़र से देखते थे, जैसे हम छूत की बीमारी हों.” ऐसे में बासुदेव द्वारा मेघा से शादी किया जाना बहुत बड़ा कदम है.basudev-kinnar

बहरहाल हिंदू रीति रिवाजों से शादी के बंधन  में बंधे मेघा और बासुदेव के परिवार वालों ने पूरे जोश खरोश से विवाह समारोह में हिस्सा लिया.साथ ही ऑल ओडिशा किन्नर एंड थर्ड जेंडर असोसिएशन ने भी इस शादी को अपना समर्थन दिया है.

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