अब छत्तीसगढ़ सरकार खुद उतरेगी ‘शराब के धंधे’ में

एक तरफ जहाँ बिहार में शराब-बंदी को लेकर बिहार सरकार सख़्त रूख अपनाई हुई है वहीं छत्तीसगढ़ सरकार ने जनता के द्वारा शराब-बंदी की मांग को खारिज़ करते हुए खुद शराब बेचने का निर्णय लिया है.

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब बिहार या गुजरात में हुई शराब-बंदी को देशभर में मॉडल की तरह प्रस्तुत किया जा रहा है.गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में शराब-बंदी को लेकर कई आंदोलन हो चुके हैं ऐसे में सरकार द्वारा खुद शराब बेचने का यह फैसला रास नहीं आ रहा है.

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छत्तीसगढ़ सरकार ने इसके लिए बकायदा मंत्रीमण्डल की बैठक कर अध्यादेश को मंज़ूरी दी है. अध्यादेश के अनुसार ‘देसी और विदेशी शराब दुकानों से प्राप्त होने  वाले राजस्व को सुरक्षित रखने और राज्य के लोगों की सेहत के ख़्याल से देसी और विदेशी शराब की फुटकर बिक्री का अधिकार अब एक नए सरकारी उपक्रम को दिया जाएगा.’ राज्य के आबकारी मंत्री अमर अग्रवाल के कहा, “अध्यादेश पर मुहर लगा दी गई है और अब इसे मंज़ूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा जाएगा.”

शराबबंदी संयुक्त मोर्चा जैसे कई संगठन छत्तीसगढ़ में शराब पर रोक लगाने के लिए लम्बे समय से संघर्षरत हैं.इन आंदोलनो को जनता का भी भरपूर सहयोग मिलता रहा है,खासकर महिलाओं का समर्थन इसे इस कदर मिला कि गनियारी,मंगला,काठाकोनी जैसे सैकड़ो गाँवों में महिलाएं शराब पीने और पिलाने वालों के खिलाफ एकजूट होकर डंडे से लैस होकर रैलियाँ निकालने लगी थी.कई बार शराब ठेकेदारों और पंडों से भी यो दो दो हाथ करती रही हैं.दरअसल शराब की वजह से सबसे ज्यादा परेशान महिलाएँ ही होती हैं. अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक वर्ष 2014 में 950 मौत शराब की वजह से 1150 मामले हत्या के प्रयास शराब की वजह से हुए थे.ऐसे में सरकार का यह अध्यादेश यह दिखाता है कि सरकार इन आंदोलनों को किस रूप में लेती है.

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सरकार की दोहरी नीति

2011 में आंशिक शराबंदी से पूर्ण शराबबंदी के नाम पर छत्तीसगढ़ सरकार ने 2 हजार से कम आबादी वाले गांवों में शराब दुकाने बंद करने की योजना आंरभ की थी. और यह कहते हुए सैकड़ों दुकाने बंद कराईं गईं कि ‘साल दर साल इसी तरह अधिक आबादी वाले गांव, कस्बों और शहरों में शराब की दुकाने बंद कराईं जाएंगी’  लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया.

परिणामस्वरूप राजस्व बढ़ाने के चक्कर में सरकार की ओर से जो पुरानी दुकानों को बंद किया जा रहा था वह कार्रवाई भी रोक दी गई है. लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से भारता माता वाहिनी के नाम से महिला समूह भी गठित की जा रही है.

राजस्व बढ़ाने के लिए बढ़ाने के लिए किस तरह शराब पर आय का लक्ष्य बढ़ाया गया यह आप देख सकते हैं.

2011 में सरकार ने आंशिक शराब बंदी योजना लागू की थी और योजना के तहत 2 हजार से कम आबादी वाले गांवों में शराब बिक्री पर रोक लगाई गई थी.सैकड़ों दुकाने योजना के तहत की गई थी बंद.फिर 2014-15 में 2 हजार 3 सौ करोड़ से अधिक की शराब बेची गई थी. वहीं 2015-16 में 3 हजार करोड़ से अधिक का शराब बेचने का लक्ष्य भी रखा गया.आँकड़ो के हिसाब से पिछले 10 साल में छत्तीसगढ़ में 10 गुना शराब की खपत बढ़ा दी गई जबकि आंशिक शराब बंदी का वादा सरकार द्वारा  किया गया था. लेकिन इस साल सरकार ने एक भी दुकाने बंद नहीं की बल्कि अब खुद की दुकान खोलने का फैसला ले लिया.

 

 

 

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