क्या छत्तीसगढ़ की पुलिस राजनीतिक पार्टी की तरह व्यवहार कर रही है?

नक्सलग्रस्त राज्य छत्तीसगढ़ में इन दिनों पुलिस पर राजनीतिक पार्टी की तरह व्यवहार करने के आरोप लग रहे हैं। ऐसे तो छत्तीसगढ़ के नक्सलग्रस्त क्षेत्रों में पुलिस पर पहले भी इस तरह के कई आरोप लगते रहे हैं लेकिन इस बार पुलिस अधिकारियों की बयानबाज़ी और सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस द्वारा हुए प्रदर्शन और नारेबाजियों से ये मामला ज्यादा तूल पकड़ने लगा है। दरअसल छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में 24 अक्टूकबर को वर्दी पहने हुए पुलिस के जवानों के द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश, बेला भाटिया, हिमांशु कुमार, मालिनी सुब्रह्मण्यम, बस्तर के पूर्व विधायक और आदिवासी महासभा के महासचिव मनीष कुंजाम, आम आदमी पार्टी की नेता सोनी सोरी और दिल्ली विश्वविद्यालय की प्राध्यापिका नंदिनी सुंदर के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की गई और इनके पुतले जलाए गए।दरअसल, साल 2011 में ताड़मेटला गांव में 160 घरों को जलाने के मामले में सीबीआई द्वारा पुलिस को जिम्मेीदार ठहराए जाने के विरोध में पुलिस ने यह प्रदर्शन किया। बस्तर के आईजी पुलिस शिवराम प्रसाद कल्लूरी ने सीबीआई की इस रिपोर्ट को ग़लत बताते हुए नंदिनी सुंदर और स्वामी अग्निवेश पर माओवादी समर्थक होने का आरोप भी लगाया।
जानकारो के मुताबिक इस तरह का यह पहला मामला है जब पुलिस द्वारा इस प्रकार का प्रदर्शन किया गया हो।पुलिस द्वारा इस प्रदर्शन से पहले प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की गई जिसमें लिखा है कि “हमलोग नक्सलियों से बस्तर की सुरक्षा के लिए फोर्स में भर्ती हुए हैं।”
“नंदनी सुंदर, हिमांशु कुमार, बेला भाटिया, सोनी सोरी एवं मनीष कुंजाम जैसे लोग नक्सल समर्थक हैं और पुलिस बलों को बदनाम करते रहते हैं।”हम ऐसे नक्सल समर्थकों से शर्मिंदा होकर इन पांचो का पुतला जला रहे हैं ताकि बस्तर के लोग इनका असली चेहरा पहचाने।”
लेकिन पुलिस के इस प्रदर्शन के बाद इस पर कई तरह के सवाल भी उठने लगे। पुलिस के जवानों ने कामकाज के समय में, वर्दी पहन कर सामाजिक और राजनीतिक दल के लोगों का पुतला जलाया, जिसे शासकीय सेवा नियमों का उल्लंघन के रूप में तो देखा जा ही रहा है। साथ ही इसे संवैधानिक खतरों के तौर पर भी देखा जा रहा है।
एक वेबसाइट से बात करते हुए सोनी सोरी ने कहा कि “बस्तर के आईजी पुलिस शिवराम प्रसाद कल्लूरी के इशारे पर जो कुछ हो रहा है, उससे यह लगता है कि बस्तर एक अलग राज्य है और कल्लूरी यहां के मुख्यमंत्री हैं। लेकिन इस तरह की हरकतों से मैं डरने वाली नहीं हूं।”
इस मामले को विपक्ष समेत सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संवैधानिक व्यवस्था के लिए खतरनाक बताया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल कहते हैं कि ‘’यह देश में पहली घटना है जिसमें पुलिस ने राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का पुतला जलाया,अब सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।‘’ साथ ही उन्होंने आईजी कल्लूरी पर आरोप लगाते हुए कहा कि ‘’ताड़मेटला में असली गुनहगार आईजी कल्लूरी हैं जिन्हें बर्खास्त कर गिरफ्तार करना चाहिए।‘’

वहीं सत्ताधारी भाजपा के नेतागण शुरूआत में इस पर बात करने से बचते रहे लेकिन बाद में इस घटना की निंदा कर जाँच की बात भी कहते नजर आए। एक अखबार को दिए अपने साक्षात्कार में मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने कहा कि ‘’वे पुलिस के इस प्रदर्शन को उचित नहीं मानते’’ हांलाकि उन्होंने ये भी कहा कि ‘’पुलिस ने बस्तर में बहुत अच्छा काम किया है और बड़ी सफलताएँ भी मिली है।‘’

वहीं आईजी कल्लूरी और छत्तीसगढ़ के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल के बीच तनातनी और जुबानी जंग को भी पुलिस के द्वारा राजनीति करने के तौर पर देखा जा रहा है।
अभी कुछ दिन पहले जब भूपेश बघेल ने सुप्रीम कोर्ट और सीबीआई की चार्जशीट के नाम पर आईजी एसआरपी कल्लूरी को जेल भेजने और तत्काल पद से हटाने की मांग सरकार से की थी। इसके दूसरे दिन बस्तर आईजी कल्लूरी ने भूपेश बघेल पर जुबानी हमला किया। भूपेश बघेल के बयान से भड़के बस्तर आईजी एसआरपी कल्लूरी ने रविवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि ‘’यदि भूपेश यह लिखकर दें कि मेरे जाने से बस्तर में नक्सलवाद खत्म हो जाएगा तो मैं 24 घंटों के अंदर ही बस्तर छोड़ दूंगा।‘’ उन्होंने दावा किया कि ‘’2017 के बाद बस्तर में नक्सली नहीं रहेंगे, मैं उन्हें खदेड़ दूंगा।‘’ इसके साथ ही उन्होंने सुरक्षा बलों पर सवाल उठाने वालों को देशद्रोही करार दिया था जिसके बाद छत्तीसगढ़ की विपक्ष ने उन्हें आड़े हाथ लिया था।
पुलिस के द्वारा हुए उक्त प्रदर्शन और बयानबाजी के अलावा अभी हाल ही में छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित सुकमा जिले के नामा गांव में एक आदिवासी की हत्या के आरोप में दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर अर्चना प्रसाद, दिल्ली के जोशी अधिकार संस्थान के विनीत तिवारी और भाकपा के प्रदेश सचिव संजय पराते सहित मंजू कवासी तथा मंगल राम कर्मा पर हत्या का मामला दर्ज किया गया जिसको भी एक वर्ग पुलिस द्वारा सामाजिक कार्यकर्ताओं को बस्तर से दूर करने की साजिश के रूप में देख रहा है।

बताया जा रहा है कि पुलिस समर्थित संगठन अग्नि की अगुवाई में ग्रामीणों ने दरभा ब्लॉक के तोंगपाल में नंदिनी सुंदर सहित कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर हत्या का मुकदमा दर्ज करके उनकी गिरफ्तारी की मांग की थी। अग्नि का आरोप है कि बघेल की हत्या में दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर का हाथ है। हांलाकि कोर्ट के द्वारा अभी इस गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई है।
इस हत्या पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए नंदिनी सुंदर ने एक वाट्स-ऐप ग्रुप में लिखा था, ‘जिसका अंदेशा था, वहीं हुआ। हमने पहले ही कहा था कि पुलिस बेकसूर, निहत्थे और कमजोर ग्रामीणों को माओवादियों से लड़ाने के लिए मोहरा बना रही है, जबकि पुलिस को खुद ग्रामीणों की सुरक्षा करनी थी।’ उन्होंने कहा कि आईजी कल्लूरी के दिमाग में कोई बड़ी साजिश चल रही है।
बहरहाल सीबीआई की रिपोर्ट के आने के बाद दंतेवाड़ा के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शिवराम कल्लूरी को ज़िम्मेवार बताते हुए लगातार उनकी गिरफ़्तारी की मांग उठ रही है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने कहा है कि “इस घटना के आरोपी तत्कालीन पुलिस अधिकारी आज भी बस्तर में पदस्थ हैं एवं राज्य सरकार की दमनकारी नीतियों के पोषक बन कर काम कर रहे हैं। हम सरकार से मांग करते हैं कि इस मामले में ज़िम्मेदार पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर तत्काल वहां से अन्यत्र हटाया जाये तथा उनके विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर, विधिक कार्यवाही संस्थित करें”
हालांकि कल्लूरी ने कहा कि, “इस मामले को राजनीतिक दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए।”

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