तीन तलाक मामले पर मीडिया का ध्यान कहीं ज़रूरत से ज़्यादा तो नहीं है?

शाम में फुरसत के वक्त आप टीवी चालू करके बैठ जाइए, बहुत मुमकिन है आपको किसी न किसी मीडिया चैनल पर ट्रिपल तलाक के मामले पर गर्मा गर्म बहस चलती हुई मिल जाए। लेकिन आपने कभी गौर किया कि क्या समस्या वाकई इतनी बड़ी है कि उस पर घंटों बहस की जाए? प्राइम टाइम्स चलाए जाएँ? क्या देश में इससे और अधिक गम्भीर समस्याएँ नहीं हैं, जिन पर वाद-विवाद हो सकता है? Continue reading तीन तलाक मामले पर मीडिया का ध्यान कहीं ज़रूरत से ज़्यादा तो नहीं है?

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गाय के निबंध में समय के साथ सुधार की ज़रूरत   

गाय के निबंध में समय के साथ सुधार की ज़रूरत   

शायद अब भी बच्चे वही निबंध लिखते होंगे कि गाय एक पालतू पशु है. गाय के चार पैर, एक पूँछ और दो सींग होते हैं. मेरी जानकारी में अभी तक इन तथ्यों में कोई भी बदलाव नहीं आया है. Continue reading गाय के निबंध में समय के साथ सुधार की ज़रूरत   

यह समय फीस बढ़ाने का नहीं बल्कि प्रोत्साहन बढ़ाने का है

यह समय फीस बढ़ाने का नहीं बल्कि प्रोत्साहन बढ़ाने का है

उच्च शिक्षा की सुलभता आम जन तक सहज और प्रभावी ढंग से विकेन्द्रित होनी चाहिए थी किंतु अभी तक हमारी शिक्षा व्यवस्था फीस वृद्धि,सीट कटौती जैसे झंझावतो में ही सिमटकर रह गई है. Continue reading यह समय फीस बढ़ाने का नहीं बल्कि प्रोत्साहन बढ़ाने का है

एंटी रोमियो: प्रेम तो इंसान बना सकता है, मगर कोई डंडा  या लोहे की लंगोट नहीं

एंटी रोमियो: प्रेम तो इंसान बना सकता है, मगर कोई डंडा या लोहे की लंगोट नहीं

एकदम नारकीय जीवन में पशुवत जीवन जीते आदमी को प्रेम तो इंसान बना सकता है, मगर कोई डंडा नहीं. न कोई लोहे की लंगोट, बता रहे हैं ललित सती Continue reading एंटी रोमियो: प्रेम तो इंसान बना सकता है, मगर कोई डंडा या लोहे की लंगोट नहीं

झारखंड के ये बच्चे खरगोश और चूहों से अपने पेट की आग बुझा रहे हैं…

झारखंड के ये बच्चे खरगोश और चूहों से अपने पेट की आग बुझा रहे हैं…

मीड डे मिल के तहत भले ही भोजन के अधिकार दिलाने की बाते कही जा रही हों लेकिन झारखंड के चूहा पहाड़ में रहने वाले जनजाति बच्चों को चूहा,खरगोश आदि खाना पड़ रहा है. Continue reading झारखंड के ये बच्चे खरगोश और चूहों से अपने पेट की आग बुझा रहे हैं…

क्या आपने हिंदी की पहली कहानी पढ़ी है?

क्या आपने हिंदी की पहली कहानी पढ़ी है?

अनेक कहानियाँ हैं जिन्हें अनेक विद्वानों ने अपना तर्क रखते हुए हिंदी की पहली कहानी कहा है. हालांकि ज्यादातर लोग माधवराव सप्रे की ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ पर पहली कहानी होने की मुहर लगाते हैं. Continue reading क्या आपने हिंदी की पहली कहानी पढ़ी है?